धर्म और आस्था

*जुबिली वर्ष 2025 की भावना में कैथोलिक धर्मप्रांत झाबुआ में क्रिसमस की व्यापक आध्यात्मिक तैयारियाँ*

कैथोलिक धर्मप्रांत झाबुआ में प्रभु येसु मसीह के जन्मोत्सव क्रिसमस 2025 की तैयारियाँ इस वर्ष विशेष आध्यात्मिक महत्व के साथ की जा रही हैं, क्योंकि यह वर्ष पोप फ्रांसिस द्वारा घोषित जुबिली वर्ष 2025 है, जिसका विषय है — “आशा के तीर्थयात्री

झाबुआ / क्रिसमस वह पवित्र अवसर है जब ईश्वर ने एक विनम्र बालक के रूप में मानव इतिहास में प्रवेश किया, और समस्त मानवता के लिए आशा, मुक्ति और नया जीवन लेकर आए। जुबिली वर्ष के प्रकाश में, बेथलेहेम की चरनी को पहले पवित्र द्वार के रूप में देखा जाता है, जहाँ से ईश्वर की दया और प्रेम संसार में प्रकट हुआ। इसी भावना को केंद्र में रखते हुए झाबुआ धर्मप्रांत की सभी पल्लीयों, मिशन स्टेशनों, संस्थाओं और धार्मिक समुदायों में क्रिसमस की व्यापक तैयारियाँ चल रही हैं।
धर्मप्रांत की सभी पल्लीयों में चरनी निर्माण के माध्यम से विश्वासियों, विशेषकर बच्चों और युवाओं को, अवतार के रहस्य से जोड़ा जा रहा है। ये चरनियाँ केवल सजावट नहीं, बल्कि विनम्रता, सादगी और ईश्वर की निकटता का जीवंत संदेश हैं, जो यह सिखाती हैं कि ईश्वर सबसे पहले हमारे हृदय में जन्म लेना चाहते हैं।
क्रिसमस के पूर्व दिनों में कैरोल गायन के माध्यम से विश्वासी घर-घर जाकर शांति, प्रेम, क्षमा और आशा का संदेश पहुँचा रहे हैं। जुबिली वर्ष में ये कैरोल आशा की घोषणाएँ बन जाती हैं, जो समाज में भाईचारे, मेल-मिलाप और आपसी सम्मान को प्रोत्साहित करती हैं। यह कैरोल गायन एक प्रकार की आध्यात्मिक तीर्थयात्रा है, जिसमें विश्वासी मसीह को लेकर समाज के बीच जाते हैं।
झाबुआ धर्मप्रांत में इस दौरान आध्यात्मिक नवीनीकरण पर विशेष बल दिया जा रहा है। सभी पल्लीयों में: *विशेष प्रार्थनाएँ और आराधनाएँ, वचन-चिंतन एवं आध्यात्मिक प्रवचन, उपवास, आत्मसंयम और प्रायश्चित, पापस्वीकार और पवित्र संस्कारों की तैयारी* के माध्यम से विश्वासियों को आमंत्रित किया जा रहा है कि वे बाहरी उत्सव से पहले अपने हृदयों को प्रभु के आगमन के लिए तैयार करें।
इस अवसर पर कैथोलिक झाबुआ धर्मप्रांत  के धर्माध्यक्ष परमपूज्य पीटर खाराड़ी ने अपने संदेश में कहा: *”जुबिली वर्ष में मनाया जाने वाला यह क्रिसमस हमें याद दिलाता है कि सच्ची आशा का स्रोत स्वयं मसीह हैं। चरनी, प्रार्थना, उपवास और कैरोलों के माध्यम से हम अपने जीवन का नवीनीकरण करें और ‘आशा के तीर्थयात्री’ बनकर अपने परिवारों, समाज और राष्ट्र में शांति, प्रेम और क्षमा के साक्षी बनें।”*
झाबुआ धर्मप्रांत के मीडिया प्रभारी फादर मनीष डामोर ने  कहा *”झाबुआ धर्मप्रांत इस पावन अवसर पर सभी विश्वासियों एवं सद्भावना रखने वाले लोगों से आग्रह करता है कि वे क्रिसमस को केवल उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि सेवा, करुणा और जिम्मेदारी के अवसर के रूप में मनाएँ, विशेषकर गरीबों, बीमारों, अकेलों और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशील बनें।”*
प्रार्थना है कि जुबिली वर्ष 2025 में मनाया जाने वाला यह क्रिसमस हर घर में आशा, हर परिवार में एकता और हर हृदय में मसीह की शांति भर दे।

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