झाबुआ
*पिटोल में चिन्मय अमृत यात्रा का भव्य स्वागत ,यहां म.प्र. से गुजरात राज्य को सौंपी गई यात्रा*
*युवाओं को पाश्चात्य सभ्यता के दुष्प्रभाव से रोक कर ऋषि परंपरा का बोध कराने की जरुरत - स्वामी प्रभुदानंद जी*

*पिटोल* (निर्भय सिंह ठाकुर ) तीन सौ दिनों में देशभर के विभिन्न राज्यों में होकर 35 हजार किलोमीटर का रास्ता तय कर पूने महाराष्ट्र से प्रारंभ होकर दिल्ली तक पहुंचने वाली इस चिन्मय यात्रा का म.प्र. एवं गुजरात राज्य की सीमा पर स्थित पिटोल में पुष्प वर्षा एवं जयघोष के साथ भव्य स्वागत किया गया। बडी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक, समाजसेवी संगठन एवं जनप्रतिनिधी उपस्थित रहे। इस दौरान क्षैत्र में भक्तिमय उल्लास देखने को मिला।

म.प्र. से यात्रा का प्रतिनिधित्व कर रहे स्वामी प्रभुदानंद जी ने एक साक्षात्कार में कहा कि इस यात्रा के माध्यम से देश भर में 8 लाख युवाओं को जोडा जाना है। जिसमें उन्हें भारतीय संस्कृति, भगवत गीता, वेद, उपनिशद के बारे में समझाने के साथ ही बढती पाश्चात्य सभ्यता के दुष्प्रभावों का बोध कराना है। आपने बताया कि पाश्चात्य सभ्यता के दुष्प्रभावों में धन पिपासा व भोग की प्रधानता ने जीवन को बदल दिया है।

*आदिवासी असल वैदिक उपासक*
आदिवासी बहुल झाबुआ जिले से होकर गुजरी इस यात्रा में सुखद अनुभुति करते हुवे आपने बताया कि आदिवासी ही वास्तव में वैदिक उपासक है कारण कि वह ही पर्यावरण के मूल सिद्वांतों से जुडा हुआ है। शहर के लोगों को आदिवासीयों से प्रकृति की रक्षा करने की तकनीक समझने की आवश्यकता है। आधुनिकता का मतलब पद ओर पैसा कमाना नहीं है। प्रकृति ने हमें क्या क्या दिया है उसके गुढ रहस्य को समझने की जरुरत है।
इसके पुर्व यात्रा पिटोल के एक निजी स्कुल पर रुकी जहां स्वामी प्रभुदानंद जी ने स्कुली छात्रों को अपने उद्गार के माध्यम से मातृ देवो भवः, पितृ देवो भवः एवं आचार्य देवो भवः की व्याख्या करते हुवे बताया कि इनके आर्शिवाद से जीवन को कृतार्थ किया जा सकता है। आर्शिवाद किसी दुकान पर नहीं मिलता बल्कि माता,पिता एवं गुरु की निः स्वार्थ सेवा ओर उनके प्रति सच्ची निष्ठा से प्राप्त होता है। जीवन की सफलता में इनकी भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इनके द्वारा दी गई शिक्षा को आत्मसात कर सफलता की सिढियां चढी जा सकती है।

*खास बातें*
– चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 वर्ष पूर्ण होने पर इस अमृत यात्रा का संयोजन।
– यात्रा में वर्तमान में 13 छात्र छात्राऐं उच्च शिक्षा प्राप्त है जो संपूर्ण यात्रा के सहभागी है।
– यात्रा के समापन अवसर पर दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी होंगे शामिल।
– 300 दिनों में 35 हजार किलोमीटर की यात्रा ।
– 8 लाख युवाओं को जोडकर उनमें जनजागृति लाना उद्देश्य।
– रथ के साथ कई वाहनां का काफिला व चिन्मयानंद जी की प्रतिमा साथ में।

स्थानिय परिवहन चेकपोस्ट पर आयोजित कार्यक्रम में चिन्मय अमृत यात्रा पर प्रकाश डाला गया। कहा गया कि यह यात्रा समाज में आध्यात्मिक चेतना, सद्भाव ओर संस्कारों के प्रसार का माध्यम है। यात्रा को म.प्र. से सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित गुजरात ले जाने हेतु स्वामी प्रभुदानंद जी इंदोर नें गुजरात के बडौदा से स्वामी देवेशानंद जी को जिम्मेदारी सौपी। यात्रा को गुजरात सीमा तक पहुंचाने के लिये स्थानीय पुलिस बल मौजुद था।



