झाबुआ

*मेघनगर औद्योगिक क्षेत्र में संचालित ओवैस कम्पनी के खिलाफ कर्मचारियों ने खोला मोर्चा*

*कई माह से वेतन नहीं मिलने की वजह से, परिवार चलाना मुश्किल,*

झाबुआ जिले के मेघनगर औद्योगिक क्षेत्र में संचालित ओवैस मेटल एंड मिनरल प्रोसेसिंग लिमिटेड एवं एसएमओ फैक्ट्री में कार्यरत कर्मचारियों को बीते कई माह से वेतन नहीं मिला है। समय पर वेतन न मिलने से कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कर्मचारियो को अपने परिजनों के उपचार के लिए भी आर्थिक मदद की गुहार लगाना पड़ रही है
कर्मचारियों का आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा वेतन भुगतान को लेकर बार-बार नई तारीखें दी जाती रहीं, लेकिन अब तक किसी भी माह का भुगतान नहीं किया गया। वेतन न मिलने के कारण , घर का किराया, बिजली-पानी के बिल और इलाज जैसी बुनियादी जरूरतें भी पूरी करना मुश्किल हो गया है। कई कर्मचारियों ने कर्ज लेकर घर चलाने की बात कही है।
इसी को लेकर आक्रोशित कर्मचारियों ने शुक्रवार को फैक्ट्री गेट के बाहर धरना-प्रदर्शन किया और बकाया वेतन का तत्काल भुगतान करने की मांग की। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
मामले में लेबर विभाग की ओर से बताया गया कि फिलहाल केवल एक कर्मचारी का आवेदन प्राप्त हुआ है, जिसकी सुनवाई 9 तारीख को तय की गई है। लेबर इंस्पेक्टर संजय कनेश के अनुसार अन्य कर्मचारियों की ओर से अभी औपचारिक आवेदन नहीं मिले हैं, और विभाग अपने अधिकार क्षेत्र में रहकर ही कार्रवाई कर सकता है। वहीं कंपनी प्रबंधन ने मामले में समय मांगा है। मगर देर शाम तक कर्मचारी कंपनी के बाहर वेतन देने की मांग पर अड़े रहे
दूसरी ओर कर्मचारी संघ ने इस मुद्दे पर कर्मचारियों का समर्थन करते हुए कंपनी प्रबंधन से जल्द से जल्द बकाया वेतन का भुगतान करने की मांग की है। संघ के जिलाध्यक्ष मोहन प्रजापति ने कहा कि झाबुआ जैसे जिले में रोजगार के सीमित अवसर हैं और जो कर्मचारी स्थानीय उद्योगों में कार्यरत हैं, यदि उन्हें समय पर वेतन नहीं मिलेगा तो पलायन बढ़ना तय है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भुगतान नहीं हुआ तो जिले स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। वही मेघनगर तहसीलदार पलकेश परमार भी मोके पर पहुचे ओर जानकारी ली
यह मामला जिले में कर्मचारियों की स्थिति, औद्योगिक प्रबंधन की जवाबदेही और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कर्मचारियों को उनका हक कब तक मिल पाता है

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