झाबुआझाबुआ से भोपाल तक
मोद नदी के डेम पर गेट नहीं लगे होने से व्यर्थ बह रहा पानी, किसानों ने जताई चिंता
3 किलोमीटर परिक्षेत्र के आधा दर्जन किसान करते है अपनी खेती सिंचित

*निर्भयसिंह ठाकुर पिटोल* – वर्षाकाल बीत जाने के बाद आधा नवम्बर बीत गया है किंतु इंदोर अहमदाबाद हाईवे के समिप मोद नदी पर बने लाखों रुपऐ की लागत से जल संचय हेतु बने डेम के गेट अब तक विभाग द्वारा नहीं लगाऐ गऐ है। लाखों लीटर पानी व्यर्थ बहने के कारण रबी की फसल लेने वाले किसानों की चिंताऐं बढ रही है।
जल की हर एक बुंद को सहेजने के लिये शासन ने अलग अलग योजनाओं में लाखों रुपऐ लगाऐ है किंतु यहां बडी मात्रा में पानी अनवरत बहकर व्यर्थ हो रहा है। गोरतलब है कि इस नदी पर बने इस डेम का पानी तकरीबन 3 किमी परिक्षैत्र के किसानों के कई एकड रकबों को सिंचित करता है। जिले के किसानों की कृषि एक बडी आजीविका का साधन है। यदि समय रहते लोक स्वा. यात्रिकी विभाग डेम के दरवाजे बंद करने का काम नहीं करता है तो आगे किसानों को अपनी फसल के लिये जद्दोजहद करना पड सकती है।]
*पांच गांवों में इसी डेम से दिया जा रहा है नल जल योजना का पानी*
बताया जा रहा है की सरकार की हर घर नल जल की मंशा के लिये घर घर पहुंचाऐ गऐ नलों में पानी, इसी डेम पर संचित कियं जाने वाले जल से जाता है। बावजुद अभी तक विभाग की सुस्ती पर ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त किया है। बुधवार को एक अंत्येष्टि में मोद नदी के उक्त डेम पर पहुंचे सैकडांे लोगों ने जब एक साथ इस व्यर्थ बहते पानी को देखा तो चिंता ही नहीं जताई बल्कि कई लोगों ने अपने अपने स्तर पर किसी ने जिम्मेदार अधिकारीयों को तो किसी ने जन प्रतिनिधीयों को वहीं से फोन पर डेम पर शीघ्र गेट लगाने हेतु अवगत करवाया। गोरतलब है कि गुणवत्ता प्रभावित क्षैत्रों के लिये बनी योजना में इस डेम को बनाया गया था। अभी वर्तमान में करडावद बडी, मसुरिया, गेहलर, खेडी पंचायत की नल जल योजना यहां से संचालित हो रही है। पिटोल क्षैत्र को भी इसी डेम से पानी दिया जाना है किंतु अभी यहां से पानी नहीं दिया जा रहा है।

*यह है किसानों की चिंता*
स्थानीय किसानों का कहना है कि डेम का पानी हमारे खेतों की सिंचाई, पशुओं की प्यास बुझाने ओर पेयजल के लिये बेहद जरुरी है। किंतु हर दिन इतना बेवजह बेहकर जा रहा है जो कि उनकी चिंता का कारण बनता जा रहा है। विभागीय अधिकारीयों को भी बताया पर अब तक गेट नहीं लगे है।

*जिम्मेदार बोले*
अत्यधिक बारिश के कारण तालाब अभी लबालब भरे है ऐसे में उन्हें गेट बंद करने हेतु लगने वाली आवश्यक काली मिट्टी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसलिये थोडा समय लग रहा है किंतु शीघ्र ही गेट लगवा दीये जाऐगें।
*डी.* *के. जैन*
*सब इंजिनियर (लो.स्वा.यां.वि.झाबुआ)*




