संघ शताब्दी वर्ष पर मेघनगर में भव्य युवा संगम : राष्ट्रनिर्माण में युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर

मेघनगर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में मेघनगर खण्ड द्वारा भव्य युवा संगम कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं, स्वयंसेवकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेवा भारती के प्रांत सचिव श्री स्वप्निल परखिया तथा खण्ड कार्यवाह श्री दिनेश पारगी थे।
कार्यक्रम की शुरुआत एक घंटे की शाखा से हुई, जिसमें विविध खेल, संवाद, सामूहिक एवं एकल गीतों के माध्यम से उत्साहपूर्ण वातावरण बना। इसके बाद आयोजित बौद्धिक सत्र में मुख्य वक्ता ने युवाओं को राष्ट्र, समाज और संस्कृति के प्रति उनकी जिम्मेदारियों से अवगत कराया।
“सेवा और समर्पण” संघ की मूल भावना – परखिया
अपने संबोधन में श्री स्वप्निल परखिया ने बताया कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा 1925 में स्थापित संघ आज समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए अपने शताब्दी वर्ष का उत्सव मना रहा है। उन्होंने कहा कि अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और परोपकार के मूल्य ही संघ को आज एक विशाल वटवृक्ष के रूप में खड़ा करते हैं।
अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण को उन्होंने एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक भावनाओं का प्रतीक नहीं, बल्कि समाज की एकता, त्याग और संघर्ष का परिणाम है। परखिया ने कहा कि यह आंदोलन भारतीय समाज के आत्मसम्मान और सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा रहा है।

युवा शक्ति ही राष्ट्र का वास्तविक आधार
वक्ता ने युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए कहा कि भारत के भविष्य की बागडोर उसके चरित्रवान, संकल्पवान और कर्तव्यनिष्ठ युवा संभालते हैं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को पढ़ाई के साथ-साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझना चाहिए।
भारत की सांस्कृतिक विरासत को उन्होंने “जीवित परंपरा” बताते हुए कहा कि इसे समझना, अपनाना और आगे बढ़ाना युवा शक्ति का कर्तव्य है।

सामाजिक चुनौतियों पर गहन विमर्श
युवा संगम में आज के सामाजिक परिवेश में बढ़ती चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वक्ता ने आधुनिक जीवनशैली, सामाजिक भ्रम, अविश्वास, कुरीतियों, धर्मांतरण और युवाओं के दुरुपयोग जैसे विषयों पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज, ग्रामीण युवा और शहरी विद्यार्थी—सभी को सही मार्गदर्शन की आवश्यकता है, ताकि वे किसी भी बाहरी दुष्प्रभाव से बचकर अपने भविष्य को सशक्त बना सकें।

ईमानदारी, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता ही राष्ट्रनिर्माण की नींव
श्री परखिया ने कहा कि राष्ट्रनिर्माण केवल भाषणों से नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर ईमानदारी, अनुशासन और समर्पण से होता है। संघ का स्वयंसेवक प्रमाणिकता और संयम के साथ समाज में कार्य करता है, और यही परंपरा संघ को अपने गौरवपूर्ण 100 वर्षों की उपलब्धि तक ले आई है।
कार्यक्रम का समापन सामूहिक भोजन के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ।




