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“मेघनगर जनपद में आज़ादी नहीं, भ्रष्टाचार का परचम: स्वतंत्रता दिवस पर फिर खुला घोटाले का पिटारा”

*2.38 लाख का आयोजन बना लूट का जरिया — बच्चे और अतिथि तक भीगते रहे, अधिकारी बोले “आगे सुधार होगा”*

झाबुआ/सुनील डाबी/झाबुआ जिले की  जनपद पंचायत मेघनगर में स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर भी भ्रष्टाचार की गंध आ रही है। दशहरा मैदान में आयोजित मुख्य समारोह पर ₹2.38 लाख से अधिक का खर्च दिखाया गया — लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि न व्यवस्था दिखी, न पारदर्शिता। बारिश के दौरान बच्चे, शिक्षक और आम नागरिक पूरी तरह भीगते रहे, जबकि अधिकारी आराम से “सफाई” देते रहे।
*5 हजार के गमले — किराए में ही उड़ा दिए सरकारी पैसे!*
कार्यक्रम की सजावट के नाम पर जनपद ने मात्र 10 गमलों का किराया ₹5,000 दिखाया — यानी प्रति गमला ₹500! स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इतने पैसों में तो नए गमले खरीदे जा सकते थे, जो भविष्य में भी उपयोगी रहते।
जनपद द्वारा इस तरह का भुगतान यह साबित करता है कि सरकारी धन को खर्च करने में कोई जवाबदेही नहीं है।
*बैठक में तय हुआ वॉटरप्रूफ टेंट, लेकिन मैदान बना तालाब*
आयोजन से पहले हुई आधिकारिक बैठक में एसडीएम की अध्यक्षता में वॉटरप्रूफ टेंट लगाने का निर्णय हुआ था। इसके बावजूद जनपद अधिकारियों ने सस्ते और घटिया टेंट लगवाए।
परिणाम — बारिश शुरू होते ही मंच, झंडा स्थल और दर्शक दीर्घा सब पानी में भीग गए। बच्चे, शिक्षक और अतिथि तक बारिश में खड़े नजर आए।
*फेल आयोजन के बाद भी पूरे बिल पास — किसके इशारे पर*
स्थानीय लोगों ने अव्यवस्थाओं की शिकायतें दीं, लेकिन जनपद अधिकारियों ने बिना जांच किए पूरा बिल पास कर दिया। सवाल उठता है  “जब कार्यक्रम सफल ही नहीं हुआ, तो भुगतान किस आधार पर किया गया?”
*क्या यह लापरवाही है या मिलीभगत?*
*जनपद सीईओ का बचाव — “नई हूं, आगे सुधार होगा”*
*जनपद सीईओ सुश्री प्रज्ञा साहू ने कहा*“मैंने हाल ही में जॉइन किया है। बेहतर व्यवस्था के निर्देश दिए थे, लेकिन टेंडर न आने से पुराने सप्लायर को ही काम देना पड़ा। अगली बार समय रहते टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाएगी।”
लेकिन सवाल यह है कि ‘अगली बार सुधार’ की बात कहकर क्या इस बार की जिम्मेदारी से मुक्ति मिल सकती है?
*अब निगाहें जिला कलेक्टर झाबुआ पर — होगी जांच या दब जाएगा मामला?*
जनपद मेघनगर में खुलेआम सरकारी धन की बर्बादी और पारदर्शिता की कमी से जनता में गुस्सा है। लोग अब जिला कलेक्टर झाबुआ से उम्मीद कर रहे हैं कि इस प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है — “अगर पंचायत स्तर पर फैल रहे इस तरह के भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगी, तो जनता का प्रशासन पर से विश्वास पूरी तरह खत्म हो जाएगा।”
*जनता की मांग*
1. स्वतंत्र जांच समिति बनाकर पूरे खर्च का ऑडिट कराया जाए।
2. जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा जाए।
3. भविष्य के आयोजनों में पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया अनिवार्य की जाए।

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