झाबुआ
*भारत आज भी विश्वगुरु है : संत श्री दयारामदास जी महाराज*
*मण्डल पीपलखूंटा का हुआ विराट हिन्दू सम्मेलन*

*मेघनगर।* पीपलखूंटा मण्डल में आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन के अंतर्गत एक भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। सम्मेलन के पूर्व सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनोहारी प्रस्तुतियाँ दी गईं। कन्या आश्रम पीपलखूंटा की बालिकाओं ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमूह का मन मोहा। वहीं भारती बड़ा घोंसलिया के बच्चों ने भगवान बिरसा मुंडा के जीवन पर आधारित प्रभावशाली प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने सराहा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संत शिरोमणि 1008 श्री दयारामदास जी महाराज, अध्यक्ष नर्मदा विरक्त मण्डल, मातृशक्ति उषा हाडा दीदी तथा मुख्य वक्ता श्री पवन जी जायसवाल, विभाग सह सेवा प्रमुख उपस्थित रहे। संत श्री दयारामदास जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष में प्रवेश के अवसर पर देशभर में हिन्दू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। यह हम सभी के लिए सौभाग्य का विषय है कि हिन्दू चेतना की यह धारा सम्पूर्ण राष्ट्र में प्रवाहित हो रही है। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज को विभाजित करने के षड्यंत्र निरंतर चल रहे हैं, किंतु हमारी जातियाँ भिन्न हो सकती हैं, धर्म एक है। अंग्रेजों ने फूट डालो और राज करो की नीति अपनाई, पर आज भी विदेशी प्रभाव भारत में विद्यमान है, जिसे समाप्त करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता में जनजातीय समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आज जनजातीय समाज को धर्मांतरण के माध्यम से हिन्दू समाज से अलग करने का प्रयास किया जा रहा है। हिन्दू सम्मेलन समाज को जाग्रत करने की चेतावनी स्वरूप लाल बत्ती है। संत श्री ने कहा कि आदिवासी समाज भारत की शान है, भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान जनजातीय समाज के साथ जीवन व्यतीत किया।
मातृशक्ति उषा हाडा दीदी ने शताब्दी वर्ष के अवसर पर समाज परिवर्तन में नारी शक्ति की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमें अपनी संस्कृति और संस्कारों की रक्षा के लिए संगठित होकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि हमें शबरी, अहिल्या, गार्गी और मीरा के आदर्शों को जीवन में उतारना चाहिए। भारत भूमि स्वर्ग समान है, जहाँ सत्य, संयम और सदाचार के मार्ग पर चलना ही हमारा कर्तव्य है।

मुख्य वक्ता श्री पवन जी जायसवाल ने ओजस्वी संबोधन में कहा कि हिन्दू भाव के कारण ही आज हम इस सम्मेलन में एकत्रित हुए हैं। हिन्दू समाज को संगठित करने में सौ वर्षों का सतत परिश्रम लगा है। उन्होंने संघ की सेवा परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश पर जब भी कोई आपदा आती है, स्वयंसेवक सबसे पहले सेवा कार्य में जुट जाते हैं। उन्होंने कहा कि गाय माता की रक्षा हमारा परम कर्तव्य है तथा भारत सदैव संस्कृति और परंपरा का देश रहा है। कार्यक्रम का समापन भारतमाता आरती और सहभोज के संकल्प के साथ हुआ।



