झाबुआ: गुड फ्राइडे पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
प्रभु यीशु के बलिदान और 'क्षमा' के संदेश को किया याद
झाबुआ, मध्य प्रदेश — झाबुआ कैथोलिक डायोसिस के समस्त गिरजाघरों में ‘गुड फ्राइडे’ (पुण्य शुक्रवार) का पर्व गहन आत्मचिंतन, उपवास और अटूट श्रद्धा के साथ मनाया गया। प्रभु यीशु मसीह के दुःखभोग और मानवता के कल्याण हेतु उनके द्वारा दिए गए सर्वोच्च बलिदान को याद कर मसीह समाज ने मौन प्रार्थना की।
कलवारी की कठिन यात्रा और क्रूस का वंदन
कैथोलिक मान्यताओं के अनुसार, आज ही के दिन प्रभु यीशु ने संपूर्ण मानवता के उद्धार के लिए अपने कंधों पर भारी क्रूस उठाकर कलवारी पहाड़ी तक की कष्टकारी यात्रा की थी। झाबुआ की विभिन्न पल्लियों में ‘क्रूस मार्ग’ (Way of the Cross) का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रभु के उन 14 पड़ावों को याद किया, जो उनके अंतिम बलिदान की गाथा कहते हैं।

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त्याग और करुणा का सर्वोच्च उदाहरण
गुड फ्राइडे केवल शोक का दिन नहीं, बल्कि यह ईश्वर के अगाध प्रेम का प्रतीक है। इस अवसर पर वक्ताओं ने संदेश दिया कि:
आत्ममंथन: यह दिन हमें अपने भीतर झांकने और अपनी गलतियों के लिए पश्चाताप करने का अवसर देता है।
क्षमा की शक्ति: क्रूस पर चढ़ते समय भी प्रभु ने अपने शत्रुओं को क्षमा किया, जो हमें सिखाता है कि प्रतिशोध से बड़ा ‘क्षमा’ का मार्ग है।
निःस्वार्थ सेवा: प्रभु का जीवन मानवता की सेवा और विनम्रता का साक्षात प्रमाण है।
धार्मिक अनुष्ठान और ‘क्रूस वंदन’
दोपहर के विशेष प्रार्थना सत्रों में गिरजाघरों में सन्नाटा और गंभीरता छाई रही। श्रद्धालु प्रभु के दुःखों में सहभागी बनने के लिए उपवास पर रहे। विशेष अनुष्ठानों में पवित्र क्रूस का वंदन और प्रभु के दुःखभोग के वचनों का पाठ किया गया। चर्च के वेदवेदी (Altar) को रिक्त रखा गया, जो प्रभु के बिछोह और उनके बलिदान की गंभीरता को दर्शाता है।
शांति और भाईचारे का संदेश
कैथोलिक डायोसिस, झाबुआ ने इस अवसर पर सभी नागरिकों को शांति, मेल-मिलाप और आशा का संदेश दिया। डायोसिस की ओर से आह्वान किया गया कि हम केवल प्रार्थना तक सीमित न रहें, बल्कि प्रभु यीशु के त्याग को अपने दैनिक जीवन में उतारें—गरीबों की सेवा करें, घृणा का त्याग करें और समाज में प्रेम का प्रकाश फैलाएं।
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