झाबुआ
नवागत एसडीएम अवंधती प्रधान के समक्ष मेघनगर की बहुआयामी चुनौतियाँ
उम्मीदों, समस्याओं और समाधान की कसौटी

झाबुआ (सुनील डाबी ) जिले के महत्वपूर्ण नगर मेघनगर में प्रशासनिक बदलाव के साथ एक बार फिर जनता की उम्मीदें जागी हैं। एसडीएम रितिका पाटीदार के स्थानांतरण के पश्चात नवागत एसडीएम अवंधती प्रधान ने पदभार ग्रहण किया है। प्रशासनिक दृष्टि से यह केवल एक औपचारिक बदलाव नहीं, बल्कि जन अपेक्षाओं, भरोसे और जवाबदेही की नई शुरुआत मानी जा रही है।
पूर्व एसडीएम से नगरवासियों को कई आशाएँ थीं, किंतु अनेक मामलों में जनता को अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाए। ऐसे में नवागत एसडीएम के सामने न सिर्फ लंबित समस्याओं का बोझ है, बल्कि प्रशासन के प्रति आमजन के भरोसे को पुनः स्थापित करने की बड़ी जिम्मेदारी भी है। यदि वे जमीनी हकीकत को समझते हुए ठोस और पारदर्शी निर्णय लेती हैं, तो उनका कार्यकाल निश्चित रूप से मेघनगर के विकास इतिहास में उल्लेखनीय बन सकता है।
यातायात अव्यवस्था: हर दिन बढ़ता खतरा
मेघनगर का मुख्य बाजार क्षेत्र, झाबुआ चौराहा, टेम्पो स्टैंड, साईं चौराहा एवं बस स्टैंड क्षेत्र लगातार यातायात जाम की समस्या से ग्रसित है। अतिक्रमण, अवैध पार्किंग, सड़क किनारे लगने वाली दुकानों और यातायात नियमों की खुलेआम अनदेखी के कारण आम नागरिकों का निकलना दूभर हो गया है।
स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के लिए यह स्थिति अत्यंत जोखिमपूर्ण बन चुकी है। कई बार एम्बुलेंस तक जाम में फँस जाती है। नवागत एसडीएम को चाहिए कि वे नगर परिषद, यातायात पुलिस और व्यापारियों के साथ समन्वय कर स्थायी ट्रैफिक प्लान, नो-पार्किंग ज़ोन और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करें।
नाबालिगों की तेज रफ्तार: कानून का भय समाप्त
नगर में नाबालिगों एवं युवाओं द्वारा बिना लाइसेंस, बिना हेलमेट और तेज रफ्तार दोपहिया वाहन चलाना आम हो गया है। यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं का मुख्य कारण भी बन रही है।
अभिभावकों की लापरवाही और प्रशासनिक सख्ती की कमी के चलते नाबालिगों के हाथों में वाहन थमा दिए जाते हैं। नवागत एसडीएम के लिए यह आवश्यक होगा कि वे पुलिस विभाग को सख्त निर्देश देकर नियमित वाहन चेकिंग, स्कूल-कॉलेज के आसपास विशेष अभियान और चालानी कार्रवाई को अनिवार्य करें।
जनसुनवाई: समाधान की जगह औपचारिकता बनती जा रही
जनसुनवाई शासन की वह व्यवस्था है, जिससे आम नागरिक अपनी समस्याएँ सीधे प्रशासन तक पहुँचा सकता है। किंतु मेघनगर में जनसुनवाई कई बार केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है। आवेदनों पर महीनों तक कार्रवाई नहीं होती, और फरियादी निराश होकर लौट जाते हैं।
नवागत एसडीएम यदि जनसुनवाई में प्राप्त आवेदनों की टाइम-लाइन तय कर, विभागवार समीक्षा बैठकें लें और लंबित प्रकरणों पर व्यक्तिगत निगरानी रखें, तो यह व्यवस्था वास्तव में जनता के लिए राहतकारी बन सकती है।
ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा: योजनाएँ कागजों तक सीमित
मेघनगर अनुभाग के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण अंचलों में राशन दुकानों की अनियमितता, पंचायतों में पारदर्शिता की कमी, स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति,
इसके अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की अनुपलब्धता और दवाओं की कमी ग्रामीण जनता के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। नवागत एसडीएम को नियमित ग्रामीण भ्रमण कर इन व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करना होगा, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँच सके।
प्रदूषण और स्वच्छता: अनदेखी बन सकती है गंभीर खतरा
नगर में बढ़ता कचरा, खुले में जलता अपशिष्ट, औद्योगिक धुआँ और नालियों का दूषित पानी पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरा बन चुका है। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो मेघनगर भी बड़े शहरों की तरह प्रदूषण संकट का शिकार हो सकता है।
स्वच्छता अभियान, कचरा प्रबंधन, नालियों की नियमित सफाई और प्रदूषण फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
अतिक्रमण और अवैध गतिविधियाँ: नगर की सुंदरता पर ग्रहण
मेघनगर में शासकीय भूमि, सड़कों और नालियों पर अतिक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे न केवल यातायात प्रभावित होता है, बल्कि नगर की सुंदरता और विकास भी अवरुद्ध होता है।
नवागत एसडीएम को निष्पक्षता और दृढ़ता के साथ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करनी होगी, ताकि प्रशासन की विश्वसनीयता बनी रहे।
अवसर भी, परीक्षा भी
नवागत एसडीएम अवंधती प्रधान के लिए मेघनगर केवल एक पदस्थापना नहीं, बल्कि एक बड़ी प्रशासनिक परीक्षा है। यदि वे संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जमीनी जुड़ाव के साथ कार्य करती हैं, तो न केवल जनसमस्याओं का समाधान होगा, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच विश्वास की खाई भी कम होगी।
मेघनगर की जनता को अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की अपेक्षा है। यही वह कसौटी होगी, जिस पर नवागत एसडीएम का कार्यकाल आंका जाएगा।
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