मध्यप्रदेश

*भारतमाता की जय बोलने वाला ही सच्चा हिन्दू – श्री कोठारी*

*जनजाति समाज आदिकाल से प्रकृति पूजक रहा है*

*मेघनगर/थांदला* राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को मदरानी में विराट हिन्दू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। सम्मेलन में जनजाति समाज के संत श्री गंगारामजी महाराज देहदा धाम गुजरात, मातृशक्ति विद्यार्थी परिषद थांदला नगर अध्यक्ष सीताजी भूरिया एवं मुख्य वक्ता प्रांत के सह धर्म जागरण संयोजक श्री ललित जी कोठारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत जनजातीय पारंपरिक वाद्य यंत्र डोल के साथ निकाली गई भव्य शोभायात्रा से हुई। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में सर्व हिन्दू समाज के लोग शामिल हुए, जहां सामाजिक समरसता का भाव देखने को मिला। इसके पश्चात अतिथियों ने भारतमाता के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर पुष्प अर्पित किए और सम्मेलन का शुभारंभ किया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सनातन धर्म ही ऐसा धर्म है जो सम्पूर्ण विश्व को परिवार मानता है। पंच परिवर्तन विषय पर अपने विचार रखते हुए सीताजी भूरिया ने कहा कि धरती माता की रक्षा का दायित्व हम सभी का है। पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। देश की आज़ादी में महिलाओं का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
परम पूज्य संत श्री गंगारामजी महाराज ने कहा कि भारत भूमि पर एक ही धर्म है सनातन धर्म। विश्व में भारत जैसा कोई देश नहीं है। धर्म की रक्षा के लिए सम्पूर्ण हिन्दू समाज को एकजुट रहना होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी संकट में धर्म परिवर्तन का मार्ग नहीं अपनाना चाहिए। गाय माता धर्म का प्रतीक हैं, उनकी रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है।
मुख्य वक्ता श्री ललितजी कोठारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि मंडल स्तर पर इतना विशाल और भव्य आयोजन होना बड़े सौभाग्य की बात है। हम भारतमाता, गौ माता, गंगा माता और मातृत्व की उपासना करने वाले लोग हैं। जनजाति समाज सदैव हिन्दू संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है। रामायण काल में माता शबरी और निषादराज गुह सामाजिक समरसता के श्रेष्ठ उदाहरण हैं। संघ की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने हिन्दू समाज की चिंता को लेकर की थी, जो आज एक वटवृक्ष के रूप में खड़ा है।
उन्होंने पंच परिवर्तन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि हमें अपने स्व को जागृत करना होगा। स्वभाषा, स्वदेशी भूषा और भोजन पर गर्व करना ही राष्ट्र का सम्मान है। जनजाति समाज आदिकाल से प्रकृति पूजक रहा है और प्रकृति की पूजा ही राष्ट्र की पूजा है। वर्तमान समय में बच्चों को मोबाइल से दूर रखने की आवश्यकता है, क्योंकि मोबाइल के कारण युवा पीढ़ी भटक रही है।कार्यक्रम के अंत में भारतमाता की आरती की गई तथा भोजन प्रसादी का वितरण हुआ। सम्मेलन में लगभग सात से आठ हजार की संख्या में हिन्दू समाजजन उपस्थित रहे।

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