कृत्रिम गर्भाधान में पिटोल अग्रणी – एल.एस. नायक को मिला जिला स्तरीय सम्मान
वर्ष 2024–25 में 315 कृत्रिम गर्भाधान कर बनाया रिकॉर्ड

पिटोल (निर्भय सिंह ठाकुर ) भारत सरकार के राष्ट्रीय पशु नस्ल सुधार कार्यक्रम के तहत दुधारु पशुओं में सर्वाधिक कृत्रिम गर्भाधान कर पिटोल क्षेत्र ने एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है। पिटोल पशुचिकित्सालय में पदस्थ सहायक पशुचिकित्सा अधिकारी एल.एस. नायक ने वर्ष 2024–25 में कुल 315 गर्भाधान कर जिले में प्रथम स्थान हासिल किया।
इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर जिला कलेक्टर नेहा मीणा ने मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय में नायक को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कलेक्टर ने कहा कि नायक का कार्य निष्ठा, संवेदनशीलता और समयपालन का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसने सरकारी कार्यक्रम को गांव-गांव तक प्रभावी रूप से पहुँचाया है।
नायक ने पिटोल क्षेत्र के 16 सुदूर एवं वनांचल ग्रामों में पहुँचकर गिर, साहिवाल, एचएफ, एचएफ क्रॉस नस्ल की गायों तथा मुर्रा भैंसों में उच्च गुणवत्ता वाले गर्भाधान किए। ग्रामीण पशुपालकों ने भी उनकी सतत सेवाओं की सराहना करते हुए उन्हें क्षेत्र का ‘पशुधन विकास नायक’ कहा।
नवम्बर माह में ही उन्होंने 50 गर्भाधान किए तथा वर्षभर में उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस अवसर पर उप संचालक, पशु चिकित्सा सेवा झाबुआ अमरसिंह दिवाकर भी उपस्थित रहे।

इन 16 गांवों में बढ़ा उन्नत नस्ल के पशुओं का कुनबा
पशु चिकित्सा अधिकारी पिटोल अनिल मेड़ा ने बताया कि नायक ने निम्न ग्रामों में सतत सेवाएँ देकर कार्यक्रम को गति दी—
पिटोल, कालिया बड़ा, कालिया छोटा, भीमफलिया, कालाखुंट, खाटापानी, बावड़ी बड़ी, बावड़ी छोटी, कांकरादरा, छालकिया, खेड़ी, पोचकानाका, मंडली बड़ी, घाटिया और कोयाधरिया।
इन गांवों में उन्नत नस्ल के पशुओं का कुनबा लगातार बढ़ रहा है, जिससे दुग्ध उत्पादन क्षमता भी बढ़ने लगी है।



