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अंतिम यात्रा भी बनी परीक्षा : चरेल गांव में शव यात्रा को करनी पड़ती है जलजंगल की यात्रा

शवयात्रा के लिए पार करना पड़ती है नाले की मुश्किल राह

झाबुआ। झाबुआ जिले की जनपद पंचायत मेघनगर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत चरेल में ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। गांव में न तो अंतिम संस्कार स्थल तक पहुँचने के लिए सड़क है, और न ही रास्ते में कोई पुलिया बनी है। ऐसी स्थिति में जब किसी घर में मौत हो जाती है, तो शोकग्रस्त परिवार को अपने दुख के साथ-साथ भारी असुविधा और जोखिम का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि अंतिम यात्रा के दौरान अर्थी को कंधे पर उठाकर पानी से भरे रास्तों से गुजरना पड़ता है। कई बार गले तक पानी में उतरकर शव यात्रा निकालनी पड़ती है, जिससे ग्रामीणों की भावनाओं के साथ-साथ उनकी सुरक्षा और स्वाभिमान को भी ठेस पहुँचती है।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि यह समस्या वर्षों पुरानी है, लेकिन आज तक न तो किसी जनप्रतिनिधि ने इसकी सुध ली और न ही प्रशासन ने कोई स्थायी समाधान खोजा।
ग्रामवासियों ने कई बार सड़क और पुलिया निर्माण की मांग उठाई, लेकिन आज तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि “मौत के बाद भी चैन नहीं है, अंतिम संस्कार भी संघर्ष बन गया है।”
ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान दे और अंतिम संस्कार स्थल तक पक्की सड़क व पुलिया निर्माण की व्यवस्था करे, जिससे कम से कम जीवन की अंतिम यात्रा तो सम्मानजनक ढंग से पूरी हो सके।
इनका कहना है 
हमारे द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे है की श्मशान से लेकर मुख्य मार्ग तक सड़क निर्माण हो सके साथ ही नाले पर पुलिया बन जावे मगर निर्माण कार्य स्वीकृत नही हो पाया इसको लेकर विभाग को भी कई बार अवगत करवा चुके है
सरपंच सुरेश बच्चू भूरिया (चरेल ) 
 ग्राम पंचायत चरेल की जनसंख्या 2400 के लगभग है अंतिम संस्कार के लिए काफी परेशानी आती है मगर आज तक कार्य की अनुमती नहीं मिल पाई
रोजगार सहायक जोगीलाल मकवाना 

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