झाबुआ से भोपाल तक
*मेघनगर की बेटियाँ बनीं प्रेरणा की मिसाल*
*‘बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत रंगोली व भाषण प्रतियोगिता में गूँजा सशक्त नारी का संदेश*

झाबुआ /सुनील डाबी/ जिले के मेघनगर की धरती पर शनिवार को बेटियों की आवाज़ ने नया इतिहास रच दिया। ‘बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ’ अभियान के अंतर्गत शासकीय पीएम श्री कन्या हायर सेकंडरी स्कूल में आयोजित रंगोली और भाषण प्रतियोगिता में बालिकाओं ने न सिर्फ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, बल्कि समाज को यह संदेश दिया कि “बेटी किसी से कम नहीं।”

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भाजपा जिला उपाध्यक्ष श्रीमती आरती भानपुरिया, समाजसेवी श्यामा ताहेड, जीआरपी थाना प्रभारी ममता अलावा, तहसीलदार पलकेश परमार, आरकेएचके परामर्शदाता दीपिका मंडोरिया, महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी राखी बारिया तथा विद्यालय प्राचार्य जे.एस. देवहरे उपस्थित रहे।
माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

थाना प्रभारी ममता अलावा ने कहा— “हर माता-पिता की तमन्ना होती है कि उनकी बेटियाँ आगे बढ़ें, लेकिन इसके लिए अनुशासन और आत्मविश्वास जरूरी है। बालिकाएँ अपने लक्ष्य से कभी न भटकें।” उन्होंने ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ पर छात्राओं को जागरूक किया।
समाजसेवी श्यामा ताहेड ने कहा— “मेरी पत्नी अशिक्षित हैं, पर मेरी दोनों बेटियाँ आज ऊँचे पदों पर हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा ही असली सशक्तिकरण है।”

भाजपा जिला उपाध्यक्ष आरती भानपुरिया ने प्रेरक उद्बोधन में कहा—
“प्रभु श्रीराम ने निषादराज गुहा को गले लगाकर ऊँच-नीच का भेद मिटाया था। हमें भी समाज में समानता और साहस का संदेश फैलाना है। मेघनगर की एक बेटी ने अपराधी को सलाखों के पीछे पहुँचाकर जो उदाहरण पेश किया है, वैसा साहस हर बालिका में होना चाहिए।”

कवि निसार पठान ने अपनी कविता “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” से वातावरण को भावनात्मक बना दिया।
कार्यक्रम में छात्राओं ने रंगोली के माध्यम से नारी शक्ति, शिक्षा, और समानता का सुंदर चित्रण किया, वहीं भाषण प्रतियोगिता में बालिकाओं ने अपने विचारों से सभी को प्रभावित किया।
कार्यक्रम का संचालन जिमी निर्मल ने किया तथा आभार राखी बारिया ने व्यक्त किया। विजेता छात्राओं को पुरस्कार वितरित किए गए। इस अवसर पर अर्चना सांकते, जेनिशा मेडा, दक्षा कुंडल, अशोक जाटव, जोशफ मावी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं विद्यालय परिवार उपस्थित रहा।



