झाबुआ
झाबुआ में “रामभरोसे” चल रहे मेडिकल स्टोर — बिना फार्मासिस्ट, किराए के लाइसेंस पर बिक रहीं ज़िंदगी से खिलवाड़ करती दवाएं

झाबुआ (सुनील डाबी ) जिले में स्वास्थ्य विभाग और औषधि निरीक्षक की अनदेखी के चलते मेडिकल स्टोर्स “रामभरोसे” चल रहे हैं। जिले के पेटलावद मेघनगर थांदला सहित ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे मेडिकल स्टोर धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, जहां पंजीकृत फार्मासिस्ट की मौजूदगी ही नहीं है। हैरानी की बात यह है कि इन मेडिकल दुकानों का संचालन वे लोग कर रहे हैं जिनके पास न कोई मेडिकल डिग्री है, न फार्मेसी की औपचारिक शिक्षा।
किराए के लाइसेंस पर फर्जी संचालन
जांच में सामने आया है कि झाबुआ जिले में अवैध रूप से किराए के फार्मासिस्ट लाइसेंस पर मेडिकल स्टोर चल रहे हैं। बिना किसी मेडिकल प्रशिक्षण के युवा अनपढ़ या अल्पशिक्षित होकर भी दवाइयां डिस्पेंस कर रहे हैं, जो कि आम जनता की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
यह सब कुछ स्वास्थ्य विभाग और ड्रग इंस्पेक्टर की मिलीभगत से हो रहा है, जो समय-समय पर जांच करने के लिए बाध्य हैं लेकिन मौन सहमति और सेटिंग के चलते महज़ कागज़ी खानापूर्ति कर रहे हैं।

कानून है सख्त, लेकिन डर नहीं
फार्मेसी एक्ट 1948 की धारा 42 के अनुसार, केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट ही डॉक्टर की पर्ची पर दवाइयां डिस्पेंस कर सकता है। नियम तो यह भी कहता है कि किसी गैर-पंजीकृत व्यक्ति द्वारा दवा वितरण करते पाए जाने पर 3 महीने की जेल या 2 लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है। इतना ही नहीं, एम.पी. स्टेट फार्मेसी काउंसिल द्वारा ऐसे फार्मासिस्ट का पंजीयन निरस्त किया जा सकता है।
लेकिन सख्त कानून होने के बावजूद कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दिखावा हो रहा है। सूत्रों की मानें तो कई मेडिकल दुकानदारों की “जांच दर” तय है—जांच अधिकारी आते हैं, लिफाफा मिलता है, जांच पूरी हो जाती है।
सरकारी आदेश हवा में उड़ाए जा रहे
8 अक्टूबर को म.प्र. फार्मेसी काउंसिल, भोपाल ने सभी मेडिकल स्टोर संचालकों को निर्देशित किया था कि मेडिकल पर फार्मासिस्ट की मौजूदगी अनिवार्य है। आदेश में साफ कहा गया था कि नियमों का उल्लंघन करने पर लाइसेंस निरस्त किया जाएगा।
लेकिन आदेश जारी हुए हफ्तों बीत चुके हैं, न तो कार्रवाई हुई, न ही निरीक्षण। इसके विपरीत, जिले में अवैध रूप से संचालित मेडिकल स्टोर्स की संख्या और बढ़ गई है।

स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की गहरी नींद
जब देशभर में जहरीले कफ सिरप से 25 बच्चों की मौत के बाद सरकार सजग हो रही है, तब झाबुआ में जिम्मेदार अधिकारी अब भी नींद में हैं। जिले में खुलेआम बिक रही अमानक और एक्सपायर्ड दवाइयां आम लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रही हैं।
अब सवाल यह है: कब जागेंगे जिम्मेदार?
क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार कर रहा है? या फिर कोई मासूम इन झोलाछाप मेडिकल स्टोर्स की लापरवाही का शिकार हो, तब जाकर जांच होगी?
अब समय आ गया है कि सरकार के निर्देशों का कड़ाई से पालन करवाया जाए। दोषी मेडिकल संचालकों पर तत्काल सख्त कार्रवाई, ड्रग इंस्पेक्टरों की जवाबदेही तय हो और आमजन को सुरक्षित, प्रमाणित फार्मास्यूटिकल सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।



