थांदला की धरती से प्रदेश की राजनीति के शिखर तक: संगीता सोनी ने फिर बजाया नेतृत्व का डंका
भाजपा की नई कार्यकारिणी में संगीता सोनी दोबारा बनीं प्रदेश मंत्री, भोपाल में हुआ ऐतिहासिक स्वागत

भोपाल (सुनील डाबी ) आदिवासी अंचल झाबुआ की थांदला तहसील से निकली भाजपा नेत्री संगीता सोनी ने एक बार फिर प्रदेश राजनीति में अपनी सशक्त पहचान दर्ज करा दी है। संगठन ने उन पर पुनः विश्वास जताते हुए उन्हें भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश की प्रदेश मंत्री नियुक्त किया है। इस अवसर पर भोपाल स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में हुआ भव्य स्वागत समारोह जोश, उत्साह और संगठनात्मक एकता का प्रतीक बन गया।
संघर्ष की राह से नेतृत्व के मुकाम तक
संगठन के प्रति पूर्ण समर्पण और वर्षों की निष्ठापूर्ण सेवा ने संगीता सोनी को प्रदेश की नेतृत्व पंक्ति में स्थापित किया है। ग्रामीण पृष्ठभूमि और आदिवासी बहुल क्षेत्र से आने वाली सोनी ने जनसेवा और महिला सशक्तिकरण को अपने राजनीतिक जीवन का आधार बनाया है। उनकी सादगी और जमीनी जुड़ाव ने उन्हें कार्यकर्ताओं के बीच “जननेत्री” के रूप में पहचान दिलाई है।

भोपाल में हुआ ऐतिहासिक स्वागत
पार्टी कार्यालय में हुए कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष समेत तमाम वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। सभी ने अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर संगीता सोनी का सम्मान किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी कर अपने उत्साह का प्रदर्शन किया। पूरे परिसर में “संगठन प्रथम, सेवा सर्वोपरि” का संदेश गूंजता रहा।
सामाजिक समरसता और महिला नेतृत्व का प्रतीक
संगीता सोनी का दोबारा प्रदेश मंत्री बनना भाजपा की नई कार्यकारिणी में संतुलित सामाजिक प्रतिनिधित्व और महिला नेतृत्व सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। उनके नेतृत्व में पार्टी ने आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी जड़ों को और मजबूत किया है।

“संगठन ही मेरी साधना है” — संगीता सोनी
अपने संबोधन में सोनी ने कहा, “संगठन और विचारधारा मेरे जीवन के प्राण हैं। पार्टी ने जो भरोसा मुझ पर जताया है, मैं उसे पूर्ण निष्ठा से निभाऊंगी।” उन्होंने केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी की ऊर्जा का स्रोत कार्यकर्ता हैं, और उनकी सेवा ही उनका धर्म है।
राजनीतिक परिदृश्य में नई ऊर्जा का संचार
बैठक में आगामी चुनावी रणनीति, महिला सशक्तिकरण और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने के मुद्दों पर चर्चा हुई। यह आयोजन केवल स्वागत तक सीमित नहीं रहा — यह प्रदेश राजनीति में महिला नेतृत्व, जनविश्वास और संगठनात्मक मजबूती का नया प्रतीक बन गया।




