झाबुआ

संघ के शताब्दी वर्ष पर पिटोल में विराट हिंदू सम्मेलन, सात हजार से अधिक लोगों की सहभागिता,

शोभायात्रा व पूजन कार्यक्रमों ने बांधा समां।

पिटोल (निर्भय सिंह ठाकुर) संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में पिटोल में रविवार को भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पिटोल सहित आसपास के अनेक गांवों से बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग शामिल हुए। सम्मेलन में लगभग सात हजार से अधिक लोगों की उपस्थिति रही, वहीं मातृशक्ति की सहभागिता भी विशेष रूप से देखने को मिली।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर शैलेषानंद जी गिरी महाराज रहे। मुख्य वक्ता झाबुआ जिला प्रचारक रजत चौहान एवं एबीवीपी विभाग छात्रा प्रमुख भूमिका पवार विशेष रूप से उपस्थित रहीं।

सम्मेलन की शुरुआत भव्य शोभायात्रा से हुई। महामंडलेश्वर गिरी महाराज को रथ में विराजमान कर सालेश्वर महादेव मंदिर, मालटोड़ी से शोभायात्रा निकाली गई, जो बस स्टैंड, आज़ाद चौक, कुंदनपुर चौराहा होते हुए पिटोल ग्राउंड पहुँची, जहाँ मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। शोभायात्रा मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर महाराज जी का स्वागत किया तथा आशीर्वाद प्राप्त किया। आज़ाद चौक पर सर्व बोहरा समाज पिटोल द्वारा महाराज जी का माला अर्पण कर सम्मान किया गया।

पिटोल ग्राउंड पहुँचने पर महामंडलेश्वर शैलेषानंद जी गिरी महाराज द्वारा पहले गौ पूजन किया गया, इसके पश्चात भारत माता की पूजा संपन्न हुई। इसके बाद महाराज जी मंच पर विराजमान हुए।

अपने उद्बोधन में महाराज जी ने भारत के ऐतिहासिक स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार 1780 के कालखंड में भारत अखंड था और विभिन्न रियासतों के रूप में संगठित था। उन्होंने समाज को संगठित रखने हेतु प्रभात फेरी निकालने एवं कुटुंब प्रबोधन पर विशेष जोर दिया।

कार्यक्रम में एबीवीपी विभाग छात्रा प्रमुख भूमिका पवार ने सामाजिक समरसता और स्वदेशी जैसे विषयों पर विचार रखे, वहीं झाबुआ जिला प्रचारक रजत चौहान ने नागरिक कर्तव्यों एवं पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की।

सम्मेलन के दौरान पिटोल की विभिन्न स्कूलों की बालिकाओं द्वारा सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिन्हें उपस्थित जनसमूह ने सराहना के साथ देखा।

कार्यक्रम के अंत में सभी गांवों से आए लोगों के लिए सहभोज का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन के लिए पिटोल एवं आसपास के गांवों से अनाज संग्रह भी किया गया था, जो सामाजिक सहयोग और एकता का संदेश देता है।

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