झाबुआ

पशु सेवा के चार दशक: सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी एल.एस. नायक को विदाई

पिटोल। पशु चिकित्सा विभाग में अपनी उत्कृष्ट सेवाओं, कर्तव्यनिष्ठा और मूक पशुओं के प्रति संवेदनशीलता के लिए पहचाने जाने वाले सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी (AVFO) श्री एल.एस. नायक की सेवानिवृत्ति पर पिटोल में एक गरिमामय एवं भावभीनी विदाई समारोह का आयोजन किया गया। चार दशकों के इस गौरवशाली सफर के समापन पर विभागीय अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय किसानों ने श्री नायक को नम आंखों से विदाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

‘कर्तव्यनिष्ठा और सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण’
समारोह को संबोधित करते हुए विभागीय अधिकारियों और वक्ताओं ने श्री नायक के कार्यकाल की जमकर सराहना की। वक्ताओं ने कहा:

“श्री एल.एस. नायक ने अपने संपूर्ण सेवाकाल में ग्रामीण अंचलों में पशु स्वास्थ्य संरक्षण और पशुपालकों की समस्याओं के त्वरित समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनकी कार्यशैली समर्पण, अनुशासन और मानवीय संवेदनाओं का अनूठा उदाहरण है।”

विदाई समारोह में विशेष रूप से पहुंचे विभागीय अधिकारी डॉ. दिवाकर ने कहा कि श्री नायक ने अपने अनुभव, कार्यकुशलता और सकारात्मक सोच से विभाग को एक नई दिशा दी। उनका यह प्रेरणादायी कार्यकाल आने वाली पीढ़ी के कर्मचारियों के लिए हमेशा अनुकरणीय रहेगा।

मूक पशुओं की दुआओं का प्रतिफल
समारोह में उपस्थित अतिथि निर्भय सिंह ठाकुर ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि मूक पशुओं की निस्वार्थ सेवा और उनकी दुआओं का ही असर है कि आज श्री नायक को क्षेत्र में इतना अभूतपूर्व सम्मान मिल रहा है। इस अवसर पर सरपंच प्रतिनिधि मकनसिंह गुंडिया ने भी क्षेत्र के विकास और पशुपालन क्षेत्र में श्री नायक के योगदान को रेखांकित किया।

किसानों ने जताया आत्मीय आभार
क्षेत्र के किसानों और ग्रामीण जनों ने भी श्री नायक का गर्मजोशी से स्वागत और सम्मान किया। किसानों ने भावुक होकर कहा कि श्री नायक ने हर विषम परिस्थिति में भी पशुपालकों के हितों को सर्वोपरि रखा। समय पर सटीक उपचार, उचित मार्गदर्शन और विभागीय योजनाओं का लाभ दिलाने में उन्होंने कभी कोई कसर नहीं छोड़ी, जिससे क्षेत्र के पशुधन को नया जीवन मिला।

“कोई देखे या न देखे, मुझे अपना फर्ज निभाना था”
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण में श्री एल.एस. नायक को शॉल, श्रीफल और स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मान से अभिभूत होकर श्री नायक ने सभी सहयोगियों और किसानों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अपने सेवाकाल का मूलमंत्र साझा किया। उन्होंने बेहद भावुक शब्दों में कहा:

“अपनी पदस्थापना के समय ही मैंने एक प्रण लिया था—’कोई मुझे देखे या न देखे, कोई मुझे सराहे या न सराहे, मुझे अपना कार्य पूरी ईमानदारी से करना है।’ मैंने अपने पूरे सेवाकाल में इसी प्रण को आत्मसात किया। विदाई की इस बेला में मिल रहा यह अपार स्नेह और विश्वास मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी पूंजी है।”

गरिमामयी उपस्थिति
इस विदाई समारोह का सफल संचालन सुश्री मोना गिद्ववानी ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से श्री जग सिंह भूरिया (अध्यक्ष, एवीएफओ संघ) डॉ. कविता चौहान डॉ. कविता भाबोर डॉक्टर मेडा सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिक, प्रगतिशील किसान और विभागीय कर्मचारी उपस्थित थे। यह विदाई समारोह बेहद भावुक माहौल में संपन्न हुआ, जहां हर आंख नम थी और हर दिल में श्री नायक के प्रति सम्मान था।

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