झाबुआ जिला चिकित्सालय: उम्मीदों का केंद्र, जहाँ थमती सांसों को मिला ‘नया जीवन’
झाबुआ के PICU में हुआ 'चमत्कार', 2 माह के मासूम की थमी सांसें फिर लौटीं

झाबुआ जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में आए क्रांतिकारी सुधार और चिकित्सकों के सेवा भाव ने एक बार फिर एक परिवार की खुशियाँ लौटने में सफलता प्राप्त की है। जिला चिकित्सालय के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) की टीम ने मस्तिष्क ज्वर (Encephalitis) से जूझ रहे 2 माह के मासूम को मौत के मुँह से बाहर निकालकर जिले की बेहतर होती स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रमाण दिया है।
आधी रात को छिड़ा जिंदगी और मौत का संघर्ष
धामनदा निवासी गुड्डू वाहुनिया के 2 माह के पुत्र सोमला की तबीयत 17 अप्रैल की सुबह अचानक बिगड़ गई। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामा से प्राथमिक उपचार के बाद उसे गंभीर स्थिति में जिला चिकित्सालय रेफर किया गया। अस्पताल पहुँचते ही शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप चोपड़ा एवं डॉ. विनोद कुमार मुवेल ने तत्काल मोर्चा संभाला।
चुनौतीपूर्ण था उपचार: 5 दिनों तक वेंटिलेटर का सहारा
जांच में पता चला कि शिशु मस्तिष्क ज्वर (इन्सेफेलाइटिस) जैसी घातक बीमारी की चपेट में है। बार-बार आ रहे झटके और गिरते ऑक्सीजन लेवल के कारण मासूम की सांसें थमने लगी थीं। डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर लिया। यह जिले की उन्नत स्वास्थ्य प्रणाली का ही परिणाम है कि आज जिला स्तर पर वेंटिलेटर जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं सुलभ हैं, जिससे मरीजों को बड़े शहरों की ओर नहीं भागना पड़ता।

सफलता के पीछे समर्पित टीमवर्क
लगातार 5 दिनों तक वेंटिलेटर और उसके बाद 7 दिनों तक सघन निगरानी (Intensive Care) में रखने के बाद शिशु की स्थिति में सुधार आया। इस मैराथन उपचार में:
विशेषज्ञों की भूमिका: डॉ. नवीन बामनिया, डॉ. भावेश परमार, और डॉ. सहादर अखाड़े की चिकित्सकीय दक्षता।
नर्सिंग स्टाफ का समर्पण: नर्सिंग ऑफिसर्स की 24 घंटे की मुस्तैदी और संवेदनशीलता।
”यह केस बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन हमारी टीम ने हार नहीं मानी। झाबुआ जिला चिकित्सालय में अब गंभीर से गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आधुनिक उपकरण और विशेषज्ञ उपलब्ध हैं, जिसका लाभ सीधे जनजातीय क्षेत्र के निवासियों को मिल रहा है।”
— चिकित्सकीय दल, जिला चिकित्सालय झाबुआ
झाबुआ: बदलती स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर
यह सफलता केवल एक उपचार नहीं, बल्कि झाबुआ जिले की सुदृढ़ होती चिकित्सा व्यवस्था की कहानी है।
अत्याधुनिक PICU: बच्चों के लिए विशेष गहन चिकित्सा इकाई (PICU) अब जीवन रक्षक सिद्ध हो रही है।
वेंटिलेटर सुविधा: गंभीर श्वसन संकट वाले मरीजों को अब जिले में ही त्वरित उपचार मिल रहा है।
कुशल विशेषज्ञ: अनुभवी डॉक्टरों की टीम जटिल केसों को सुलझाने में सक्षम है।
आज शिशु सोमला पूरी तरह स्वस्थ है और मुस्कुराते हुए अपने माता-पिता के साथ घर लौट चुका है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की इस सक्रियता ने जनता के बीच सरकारी अस्पतालों के प्रति विश्वास को और मजबूत किया है।




