झाबुआ: सिस्टम की संवेदनहीनता; कुएं में मिला लापता महिला का शव, पीएम के लिए भटकते रहे परिजन

झाबुआ। जिले के ग्राम कानाकुआं में मानवता और सरकारी सिस्टम को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ रविवार से लापता 40 वर्षीय महिला सागरीबाई का शव मंगलवार देर शाम घर के पास ही एक कुएं में मिला। बुधवार सुबह जब पुलिस ने शव को बाहर निकाला, तो वह पूरी तरह डिकम्पोज (गल चुका) हो चुका था। इसके बाद शुरू हुआ पुलिस और परिजनों की परेशानी का वो सिलसिला, जिसने व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी।
शव वाहन के लिए घंटों मिन्नतें
शव की स्थिति इतनी खराब थी कि दुर्गंध के कारण कोई भी वाहन चालक उसे पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल ले जाने को तैयार नहीं हुआ। चौकी प्रभारी सुरेंद्रसिंह सिसोदिया ने जिला स्तर तक शव वाहन के लिए संपर्क किया, लेकिन घंटों तक सरकारी मदद नहीं मिली। अंततः काफी मशक्कत के बाद एक निजी वाहन की व्यवस्था कर शव को अस्पताल पहुंचाया गया।

डॉक्टरों की मनमानी: पीएम के लिए करना पड़ा लंबा इंतजार
अस्पताल पहुँचने के बाद भी परिजनों की त्रासदी खत्म नहीं हुई। चूंकि मामला संदिग्ध था और महिला से जुड़ा था, इसलिए महिला डॉक्टर की मौजूदगी अनिवार्य थी। अस्पताल की महिला चिकित्सक डॉ. उर्मिला चोयल अनुपस्थित थीं, जिसके बाद झकनावदा पीएचसी की डॉ. ममता वास्केल को बुलाया गया। आरोप है कि उन्होंने आने से स्पष्ट इनकार कर दिया। इसके चलते पुलिस और बदहवास परिजन शाम तक अस्पताल में भटकते रहे। अंत में बांडेड डॉक्टर कृतिका चौहान को बुलाया गया, तब कहीं जाकर शाम को पोस्टमार्टम हो सका।
”पोस्टमार्टम के लिए बुलाए जाने पर कोई भी डॉक्टर मना नहीं कर सकता। यह गंभीर लापरवाही है। संबंधित डॉक्टर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जा रहा है।”
— डॉ. भारत सिंह बघेल, सीएमएचओ
जांच जारी: पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा। लेकिन इस घटना ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं और शव प्रबंधन की बदहाली को उजागर कर दिया है।



