झाबुआ

**नर सेवा ही नारायण सेवा: समर्पण के 11 वर्ष पूर्ण कर मानवता का तीर्थ बना ‘रोटरी क्लब अपना मेघनगर’**

(झाबुआ)। (सुनील डाबी )*”जहाँ पीड़ित मानव के आंसू पोंछे जाते हैं, वहीं ईश्वर का वास होता है।”* इसी सनातन और सेवाभावी विचार को धरातल पर उतारते हुए **’रोटरी क्लब अपना मेघनगर’** 11 जून को अपनी स्थापना के 11 गौरवशाली वर्ष पूर्ण कर रहा है। इन 11 वर्षों की यात्रा केवल एक संस्था का सफरनामा नहीं है, बल्कि यह मेघनगर और अंचल के ग्रामीण क्षेत्रों में ‘नर सेवा को ही नारायण सेवा’ मानकर किया गया एक महायज्ञ है।
11 वर्ष पूर्व रोपे गए इस सेवा के पौधे ने आज एक ऐसा विशाल वटवृक्ष रूप ले लिया है, जिसकी छांव में प्रतिदिन हजारों बेसहारा, बीमार और जरूरतमंद लोग संबल पा रहे हैं।
### **पीड़ित नारायण की सेवा: अंतिम सफर तक का निस्वार्थ साथ**
शास्त्रों में कहा गया है कि किसी दुःखी की सेवा करना ही ईश्वर की सच्ची पूजा है। क्लब ने इस भाव को आत्मसात करते हुए समाज के उस अंतिम छोर के व्यक्ति की चिंता की, जिसका कोई सहारा नहीं है। निर्धन, निराश्रित और अनाथ दिवंगत आत्माओं का पूर्ण सम्मान और मर्यादा के साथ अंतिम संस्कार करवाकर संस्था ने समाज को मानवता का सर्वोच्च पाठ पढ़ाया है।
दुख और आपातकाल की घड़ी में निःशुल्क एंबुलेंस, शव वाहन, मोक्षरथ, वातानुकूलित शवगृह और चलित डेड बॉडी फ्रीजर के माध्यम से रोटरी क्लब हर पीड़ित परिवार के साथ एक आत्मीय परिजन की तरह खड़ा दिखाई देता है।
### **चिकित्सा उपकरण बैंक: बीमारी में बने असहायों का संबल**
जब कोई निर्धन परिवार बीमारी से जूझता है, तो रोटरी क्लब उसमें नारायण के दर्शन कर मदद के हाथ बढ़ाता है। संस्था द्वारा संचालित **’चिकित्सा उपकरण बैंक’** में आज करीब 230 आधुनिक जीवन-रक्षक उपकरण उपलब्ध हैं, जो जरूरतमंदों को बिना किसी शुल्क के प्रदान किए जाते हैं। इसके साथ ही फिजियोथैरेपी सेंटर और आपातकालीन रक्तदान सेवा के जरिए क्लब चौबीसों घंटे पीड़ितों के शारीरिक कष्ट को हरने का सेवा-व्रत निभा रहा है।
**मूक जीवों में ईश्वर का रूप: जीव दया और पर्यावरण**
*’सिआ राम मय सब जग जानी…’* के भाव को जीते हुए रोटरी क्लब ने केवल इंसानों की ही नहीं, बल्कि मूक पशु-पक्षियों की सेवा को भी ईश्वर की आराधना माना है। चिलचिलाती धूप में मूक प्राणियों की प्यास बुझाने के लिए नगर में **105 पानी की होदियाँ** स्थापित की गई हैं। पक्षियों के लिए सुरक्षित घरोन्दे, रोटरी गार्डन का निर्माण और सघन वृक्षारोपण के संकल्प से संस्था प्रकृति और ईश्वर के बीच एक सेतु का काम कर रही है।
शिक्षा की अलख और नारी शक्ति का सम्मान
बच्चों में ईश्वर का रूप होता है, इसी भाव के साथ रोटरी क्लब गरीब और होनहार विद्यार्थियों के हाथों में शिक्षा की सामग्री, स्कूलों में आधुनिक फर्नीचर और स्मार्ट क्लास की सुविधाएं सौंपकर उनके भविष्य को उज्ज्वल बना रहा है। वहीं, समाज की आधी आबादी यानी नारी शक्ति के स्वास्थ्य और सम्मान की रक्षा के लिए कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में **’रोटरी सेनेटरी नेपकिन बैंक’** का संचालन कर क्लब संस्कारों की नई नींव रख रहा है।
संकटकाल में बने ‘संकटमोचन’
कोरोना जैसी वैश्विक आपदा के समय जब लोग अपनों से दूर हो रहे थे, तब रोटरी क्लब के सेवाभावी सदस्यों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए भोजन, राशन, सैनिटाइजर और सांसे बांटते ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था की। समय-समय पर आयोजित होने वाले निःशुल्क प्लास्टिक सर्जरी, ऑर्थोपेडिक और स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से क्लब ने हजारों असहाय मरीजों के चेहरों पर मुस्कान लौटाई है।
**जनता का अटूट विश्वास ही हमारी पूंजी:**
स्थापना दिवस के पावन अवसर पर रोटरी क्लब के पदाधिकारियों और कर्मठ सदस्यों ने भावुक होते हुए कहा कि— *”हमारे लिए हर जरूरतमंद व्यक्ति साक्षात नारायण (ईश्वर) का रूप है, और उनकी सेवा ही हमारी सबसे बड़ी साधना है।”* उन्होंने इस महायज्ञ में निरंतर आहुति देने वाले नगरवासियों, प्रबुद्ध समाजसेवियों और दानदाताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और संकल्प लिया कि आगामी वर्षों में भी सेवा, त्याग और तपस्या का यह कारवां निरंतर समाज हित के नए प्रतिमान स्थापित करता रहेगा।

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