झाबुआ

असुविधाओं के बीच 5* *करोड के नवीन सामुदायिक* *स्वा. केन्द्र में गुंजी* *पहली किलकारी*

*सास बोली बहु को* *अगर बेटी होती तो* *ओर ज्यादा खुशी होती*

*पिटोल* // निर्भयसिंह ठाकुर //शनिवार को पिटोल के नव निर्मित सामुदायिक स्वा. केन्द्र में उस समय खुशियों की लहर दौड आई जब शाम 5 बजकर 6 मिनट पर समिपस्थ ग्राम मलवान की एक आदिवासी महिला वसनी अरविंद मेडा ने बेटे को जन्म दिया। बहु की देखरेख कर रही सास थावरी बाई ने बोला की बहु को एक बेटा पहले से था अबकी बार बेटी हो जाती तो ज्यादा खुशी होती। सासु माॅ की बात का बहु वसनी ने भी मुस्करा कर समर्थन कर दिया। नवीन भवन में पहली प्रसुति की खुशी तो चेहरे पर थी पर वसनी बाई के मन में दर्द इस बात का था कि यहां आकर भी उसे जमीन पर ही लेटना पड रहा था।
5 करोड 74 लाख रुपऐ की लागत से बने इस भवन को लम्बे समय से चालु किये जाने की क्षैत्र के लोगों को प्रतिक्षा थी। गत दिनों इस आशय की खबर ‘‘ पांच करोड का भवन खाली, जमीन पर हो रही प्रसूति ’’ के प्रकाशन के बाद दुसरे दिन ही इसका ओपचारिक शुभारंभ कर दिया गया। प्रा. स्वा. केन्द्र से उन्नयित होकर यह सामुदायिक स्वा. केन्द्र में तब्दील हो गया। नवीन भवन भी मिल गया किंतु भवन के अंदर की तस्वीर अभी भी वैसी ही है। प्रसुताओं को अपने नवजातों को लेकर अभी भी जमीन पर ही सोना पड रहा है। 11 जुलाई को शुरुआत होने के बाद 12 जुलाई के दोपहर 12 बजे के बीच 18 घंटे में यहां कुल 8 माताओं ने अपने बच्चों को जन्म दिया। कुछ को पलंग मिले तो कुछ को प्रसुति के बाद जमीन ही नसीब हुई।

*30 बिस्तरों वाले इस भवन में अभी नहीं कोई सुविधा*
बताया जा रहा है कि यहां अब तक कोई नऐ पलंग. बिस्तर नहीं आऐ है। पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। कारण कि यहां कोई ऐसा जल स्रोत नहीं है जिससे इतने बडे भवन में स्वच्छता के लिये पानी उपलब्ध कराया जा सके। वर्तमान में टेंकरों से पानी खरीदकर आपुर्ति करवाई जा रही है। बिजली गुल होने पर अंधेरे में रहना पड रहा है। इन्वर्टर का बेकप ईतना नहीं है कि वह संपुर्ण भवन को रोशनी दे सके। स्टाॅफ के लिये रहवासी कक्षों की भी दरकार है। आवश्यक फर्निचर भी नहीं है।

*नर्सिग स्टाॅफ ने रोपा पहले जच्चा बच्चा के साथ पौधा*
नवीन भवन की पहले जच्चा बच्चा परिवार के साथ स्थानीय नर्सिग स्टाॅफ ने परिसर में आम का पौधा रोपा। इस अवसर पर समुचे स्टाॅफ ने कामना की कि बच्चे का जीवन एक विशाल वट वृक्ष की तरह आकार ले। यहां आने वाली प्रत्येक प्रसुताऐं स्वस्थ होकर परिवार में खुशहाल रहे। डाॅ. विजेन्द्र मेरावत ने बताया कि जल्द ही विभाग में यहां व्याप्त असुविधाओं के लिये विभागीय आला अधिकारीयों को अवगत करवाकर शीघ्र ही आवश्यक सुविधाओं के लिये मांग पत्र भेज रहे है जिससे प्रसुताओं को परेशानी का सामना न करना पडे।

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