झाबुआ

*पिटोल में प्राकृतिक सोन्दर्य के बीच जन सहयोग से बने मुक्तिधाम में लगाऐ जा रहे पेवर ब्लाॅक*

*15 वें वित आयोग के जनपद स्तर से दी गई 4 लाख 75 हजार की स्वीकृत राशि से होगा कार्य*

पिटोल (निर्भय सिंह ठाकुर ) पिटोल कस्बे में मुक्तिधाम की समस्या से परेशान ग्रामीणों ने कोविड काल में जन सहयोग से मुक्तिधाम का बीडा उठाकर पिटोल कस्बे में घर घर जाकर सहयोग राशि एकत्रित कर 10 लाख रुपऐ की बडी राशि एकत्र कर कंटीली झाडीयों की सफाई कर एक वर्ष में मुक्तिधाम का निर्माण करवा दिया। सोन्दर्य व हरियाली के लिये वहां तरह तरह के पेड पौधे लगावाऐ गऐ जो कि अब पेडों के रुप में आकार लेने लगे है। वर्तमान में मुक्तिधाम परिसर चारों ओर से हरियाली व रंग बिरंगे फुलों से आच्छादित है।
रविवार को यहां जन प्रतिनिधियों नें इसको ओर अधिक सुन्दर व सुविधाजनक बनाने के लिये शासकीय मद से आऐ 4.75 लाख की 15 वे वित आयोग की जनपद स्तर से दीगई राशि व 3.25 हजार की जनसहयोग राशि मद से लगाऐ जाने वाले पेवर ब्लाॅक कार्य का उद्घाटन किया। पुर्व में पिटोल पंचायत ने पानी की सुविधा के लिये यहां योजना के तहत कूप निर्माण करवाया था जो कि आज पर्याप्त पानी के साथ मुक्तिधाम की जल सुविधा की आपुर्ति कर रहा है।

*ये जन प्रतिनिधी थे मौजुद*
झाबुआ जनपद अध्यक्ष के प्रतिनिधी के रुप में हरु भाई भूरिया, जिला पंचायत सदस्य बहादूर हटीला, सरपंच प्रतिनिधी मकनसिंग गुंडिया, उपसरपंच रामकृष्ण नागर, महेन्द्रसिंह ठाकुर, जगदीश बडदवाल, मडु भाई प्रजापत, दिनेश मेवाड, विनोद पंचाल, यादवेन्द्रसिंह सिकरवार, प्रतीक शाह, अतुल चैहान सहित अन्य गणमान्य जन उपस्थित थे।

*टायरों पर रख करना पडता था अंतिम संस्कार*
एक समय था जब यहां न उचित जमीन थी न शेड। खुले आसमान के निचे अंतिम संस्कार की थी मजबूरी। बारिश के मौसम में कई मर्तबा ऐसे अवसर आऐ जब चिता को जलाने के लिये गीली लकडी होने के कारण टायरों का सहारा लेना पडा। अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिये दूर दराज से आने वाले लोग गांव व सरकारी सुविधाओं की हंसी करते थे। लकडी के लिये गुजरात के गांव जाना पडता था। चिता को लेकर 5 किलोमीटर दूर जाते थे लेकिन युवाओं की कर्मठता ओर जन सहयोग से बना पिटोल का यह मुक्तिधाम आज लोगों को प्रेरणा दे रहा है। समय समय पर इस अभियान में तत्कालीन पंचायत के चूने गऐ सरपंच एवं पंचों का भी सहयोग मिलता रहा है जो कि इस धाम की सोन्दर्यता को ओर आगे बढा रहा है।

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